प्रत्येक शनिवार प्रातः 8 बजे से शाम 6 बजे तक दरबार लगता है ! आरती, टोकन, उपदेश और जनसुनवाई की जाती है !

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शेषनाग जनता दरबार

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शेषनाग जनता दरबार - परिचय

शेषनाग जनता दरबार, विद्याधर नगर, जयपुर, राजस्थान, भारतवर्ष में स्थित है। दरबार का संचालन शेषनाग महाराज के प्रतिनिधि श्री गुलाब चन्द लाखीवाल (महाराज जी) के माध्यम से अंधविष्वास, पाखण्डवाद, रूढ़ीवाद एवं वंषानुगत परम्पराओं को समाप्त करने पर जोर दिया जाता है। प्रत्येक शनिवार को निःषुल्क एवं निःस्वार्थ भाव से सार्वजनिक रूप से निजी, पारिवारिक, व्यापारिक, षारीरिक, मानसिक, आर्थिक समस्याओं को अकेले/सामूहिक रूप से आपसी सलाह के द्वारा बुद्धि/विवेक से समाधान करने का प्रयास किया जाता है। सभी समस्याओं का समाधान मानव को रोजगार से जोड़कर अपने एवं परिवार की आवष्यक जिम्मेदारियों को पूर्ण करने के लिए आर्थिक रूप से मानव जगत को सुदृढ़ करने की ओर प्रेरित किया जाता है जिससे कि व्यक्ति अपने परिवार के साथ सुख/आनन्द एवं स्वाभिमान से अपने जीवन को जीवनपर्यन्त जी सके।

शेषनाग जनता दरबार मानव सेवार्थ कार्य करते हुए भौतिक और आध्यात्मिक जीवन के बारे में अवगत करवाता है। संतों एवं महापुरूषों द्वारा रचित वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, गीता, गुरूग्रन्थ साहिब, बाईबिल, कुरान् एवं अन्य सद्ग्रन्थों के आधार पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए समय एवं परिस्थिति के अनुसार वास्तविकता से रूबरू करवाता है।

परमात्मा के सृष्टि विधान को शेषनाग महाराज जी के द्वारा महाकाव्य ग्रन्थ की रचना कर प्रकृति के अनुरूप मानव जीवन-चक्र को जीने का विधान अपनाने के लिए प्रेरित करने का कार्य किया जाएगा। मानव को वास्तविक जीवन में अच्छी संगत एवं सुसंस्कारों को अपनाकर प्रकृति एवं प्रकृति से उत्पन्न सभी के साथ प्रेम का व्यवहार करना चाहिए।

सृष्टि/प्रकृति का निर्माण मानव, जीव-जन्तु, पषु-पक्षी, वनस्पति, पहाड़ एवं नदियां इत्यादि को मिलाकर हुआ है। उक्त सभी स्वतंत्र रूप से अपने-अपने अस्तित्व में बने रहने चाहिए जिससे सम्पूर्ण सृष्टि सुरक्षित रह सके। मानव जगत द्वारा प्रकृति के अस्तित्व के साथ छेड़छाड़ करने की वजह से प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के लिए मानव जगत को आगे लाने का प्रयास किया जाएगा जिससे कि प्रकृति के प्रकोप से सभी जीवों को बचाया जा सके।

 

शेषनाग जनता दरबार: दिषा-निर्देष

  1. शेषनाग जनता दरबार से जुड़ने के लिए वेबसाइट के माध्यम से रजिस्ट्रेषन करवाना अति आवष्यक है।
  2. शेषनाग जनता दरबार द्वारा यदि आप अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं तो अपने घर एवं व्यापार प्रतिष्ठान पर सुबह-षाम परमात्मा के नाम से देषी घी का दीपक जलाएं और परमात्मा के नाम का जल भरकर खाने-पीने वास्ते उपयोग में लेवें।
  3. शेषनाग जनता दरबार में यदि आप द्वारा महाराज जी के बताये अनुसार स्वयं एवं परिवार के साथ रजामन्दी है, उस स्थिति में भूत, प्रेत, पितृ, भैरू जी, भौम्या जी, माता-बहनें एवं महामाया इत्यादि को नहीं मानना है।
  4. शेषनाग जनता दरबार द्वारा किसी भी धर्म एवं जाति के पौराणिक देवी-देवताओं एवं मान्यताओं के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाता है। आप अपनी स्वयं की आस्था/मान्यता के लिए स्वतन्त्र हैं।
  5. शेषनाग जनता दरबार में आए हुए किसी भी भक्त के साथ अमीरी-गरीबी, जाति-धर्म, रंग-रूप, पहनावे, स्त्री-पुरूष, बच्चे, बूढ़े, जवान, रोगी-भोगी, अपराधी, सन्त, महापुरूषों, पण्डित, मौलवी, पादरी, मुनियों एवं इत्यादि के साथ किसी भी प्रकार का महाराज जी एवं दरबार के सदस्यों द्वारा भेदभाव नहीं किया जाता है और ना ही किसी को भेदभाव करने की अनुमति देते हैं। महाराज जी की नजर में स्त्री एवं पुरूष दो ही जाति है एवं मानवता ही धर्म है।
  6. शेषनाग जनता दरबार में आने वाले भक्तों को क्रम से टोकन लेने के उपरांत ही सुना जाता है। अलग से सिफारिष एवं वी.आई.पी. आधार पर सुनवाई की व्यवस्था नहीं है।
  7. शेषनाग जनता दरबार में महाराज जी द्वारा भक्त की समस्या के अनुसार बताए गए उपाय करने के उपरान्त भी समस्या का समाधान नहीं होता है तो शेषनाग जनता दरबार उसके लिए जिम्मेदार एवं बाध्य नहीं है।
  8. शेषनाग जनता दरबार द्वारा समस्या-समाधान के लिए भक्त को बताए उपाय स्वयं को ही करने होते हैं। समाधान बिना खर्चे, सात्विक देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना एवं आराधना के द्वारा ही करवाएं जाते हैं। दरबार द्वारा भक्त से किसी भी प्रकार के मंत्र, तंत्र, यंत्र एंव जीव हत्या से संबंधित पूजा नहीं करवाई जाती है।
  9. शेषनाग जनता दरबार भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र, टोना-टोटका, बंधन इत्यादि का समर्थन नहीं करता है क्योंकि यह एक प्रकार का मानसिक रोग है।
  10. दरबार द्वारा होम्योपैथी डॉक्टर के माध्यम से मानसिक रोग की प्रत्येक शनिवार को सांयकाल 03ः00 बजे से 05ः00 बजे तक निःषुल्क कन्सलटेन्सी के माध्यम से दवा दी जाती है।
  11. शेषनाग जनता दरबार द्वारा पारिवारिक कलह से संबंधित मामलों में आपसी समझौते के आधार पर राजीनामा/सुलह करने पर जोर दिया जाता है जिससे अनावष्यक मतभेद एवं खर्चों से बचा जा सके।
  12. शेषनाग जनता दरबार द्वारा पाखण्डवाद, परम्परागत रूढ़ीवादी परम्पराओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाकर समाप्त किया जाता है।
  13. शेषनाग जनता दरबार सावड़-सूतक एवं श्राद्ध जैसी मान्यताओं को भी नहीं मानता है और ऐसी मान्यताओं का पुरजोर विरोध करता है।
  14. शेषनाग जनता दरबार में आए हुए भक्तों से अनुरोध है कि वो स्वयं, परिवार, रिष्तेदार एवं मित्रगणों को सलाह देवें कि किसी भी मन्दिर, मस्जिद, गुरूद्वारा एवं अन्य आस्था से जुड़े हुए धार्मिक स्थलों पर नकद या अन्य किसी भी प्रकार से चढ़ावा नहीं चढ़ावें।
  15. भक्त अपने ही आस-पास जरूरतमंद की दान/पुण्य के रूप में स्वयं अपने हाथों से रोटी, कपड़ा, षिक्षा, स्वास्थ्य, मकान एवं रोजगार की व्यवस्था करवाएं।
  16. शेषनाग जनता दरबार द्वारा तलाकषुदा, विधवा/वीरांगना, प्रेम विवाह, विधुर विवाह, अन्तर्जातीय विवाह, पुनर्विवाह एवं अनाथ बालक-बालिकाओं के विवाह को प्रोत्साहित कर आवष्यक व्यवस्थाएं की जाएंगी।
  17. शेषनाग जनता दरबार में किसी भी प्रकार से फल, फूल, प्रसाद, कपड़े, नकदी एवं अन्य कोई सहयोग नहीं लिया जाता है।
  18. शेषनाग जनता दरबार में भक्त की मनोकामना पूर्ण अर्थात् समस्या का समाधान होने पर ही भक्त महाराज जी की अनुमति से ही फल-फूल, प्रसाद इत्यादि ला सकता है।
  19. शेषनाग जनता दरबार में मानव जीवन-चक्र को व्यवस्थित एवं खुषहाल बनाने के लिए प्रत्येक शनिवार सायंकाल 04ः00 बजे से 05ः00 बजे तक सुसंगत, व्यवहारिक, नैतिक, उपदेष/संदेष देकर सामूहिक रूप से चर्चा की जाती है।
  20. शेषनाग जनता दरबार में आए हुए भक्तों से अनुरोध है कि सायंकाल आरती तक रूककर पंचमेवा/प्रसाद/जलपान ग्रहण करके ही प्रस्थान करें। अति आवष्यक हो तभी आरती से पूर्व जा सकते हैं।
  21. शेषनाग जनता दरबार में शांति व्यवस्था बनाए रखें। दरबार के अलावा अनाष्वयक बाहर नहीं बैठें और मोबाइल को साइलेंट या स्वीच ऑफ रखें।
  22. शेषनाग जनता दरबार में सभी भक्तगण स्वयं की साफ-सफाई का विषेष ध्यान रखते हुए दरबार परिसर को साफ-सुथरा बनाएं रखें।
  23. शेषनाग जनता दरबार में आने वाले सभी भक्तगण जाति-धर्म से ऊपर उठकर आपस में प्रेम, सदभाव को अपनाते हुए मानव होने का परिचय देवें।
  24. शेषनाग जनता दरबार एवं मानव जगत में अमर्यादित भाषा व अनुचित व्यवहार करना सख्त मना है।
  25. शेषनाग जनता दरबार में आने वाले सभी भक्तगणों से अनुरोध है कि बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, जर्दा, पान-मसाला, सुपारी, शराब, मांस, अण्डे इत्यादि नषीले पदार्थों का सेवन ना करें।
  26. शेषनाग जनता दरबार द्वारा या दरबार के किसी भी सदस्य द्वारा किसी भी रूप में दान या दक्षिणा की मांग की जाती है तो महाराज जी को इसके बारें में भक्त अवगत करवायें।
  27. भक्त द्वारा किसी भी प्रकार का दान या दक्षिणा के बारें में जानकारी लेना चाहता है तो दरबार द्वारा मोबाईल नं. जारी किए गए हैं, उन्हीं पर जानकारी प्राप्त करें, अन्य किसी से नहीं। यदि आपको किसी के द्वारा किसी भी तरीके से ठगा जाता है तो शेषनाग जनता दरबार किसी भी स्थिति/परिस्थिति में उत्तरदायी/जिम्मेदार नहीं है। भक्त स्वयं जिम्मेदार होगा।
  28. शेषनाग जनता दरबार में किसी भी व्यक्ति को किसी भी रूप में रूपये/सामग्री/इनाम देना मना है। यदि कोई भी व्यक्ति शेषनाग जनता दरबार के नाम से रूपये/सामग्री/इनाम या अन्य मांग करता है तो दरबार में दरबार के सदस्य या महाराज जी से सीधी षिकायत करें।
  29. शेषनाग जनता दरबार में किसी से भी कोई आपत्ति/षिकायत/सुझाव हो तो दरबार के सदस्य या महाराज जी को लिखित में देवें।
  30. शेषनाग जनता दरबार द्वारा किसी भी धर्म को मान्यता या बढ़ावा नहीं देता है। केवल प्रकृति से प्रेम एवं मानव को मानवता से जीना सीखाता है।
  31. शेषनाग जनता दरबार का सदस्य किसी भी रूप में दान या पारितोषिक की मांग करता हुआ पाया जाता है तो उसे दरबार से हमेषा-हमेषा के लिए निष्कासित कर दिया जाएगा जिसके लिए वह सदस्य स्वयं जिम्मेदार होगा।

 

शेषनाग जनता दरबार - लक्ष्य/उद्देष्य

  •  मानव समाज कल्याणार्थ, भौतिक एवं आध्यात्मिक जीवन को आधुनिक तरीके से जीने के लिए रोजगार के माध्यम से रोटी, कपड़ा, मकान, षिक्षा एवं स्वास्थ्य को उपलब्ध करवाने के लिए .........................।।
  • मानव का मानव एवं प्रकृति के प्रति ईर्ष्या, द्वेष एवं घृणा को खत्म कर प्रेम को अपनाते हुए सुखमय ओर आनन्द से जीवन को जीने की ओर एक कदम ................।।
  1. मानव समाज में सुख-सुविधाओं से वंचित वर्ग के लिए मदद करने वाले लोगों, स्वयंसेवी संस्थाओं, ट्रस्ट, सरकारी संस्थाओं इत्यादि का सहयोग एवं समर्थन किया जाएगा।
  2. रोटी, कपड़ा एवं मकान इत्यादि से वंचित लोगों के लिए भारत सरकार एवं राज्य सरकार की उपलब्ध योजनाओं के माध्यम से एवं ट्रस्ट द्वारा सहयोग किया जाएगा।
  3. उच्च षिक्षा को तकनीकी एवं रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए शोध एवं रिसर्च कर भारत सरकार एवं राज्य सरकार को षिक्षा नीति में बदलाव के लिए सुझाव दिए जाएंगें।
  4. बेरोजगारी, महंगाई, कालाबाजारी, मिलावट एवं भ्रष्टाचार इत्यादि पर शोध एवं रिसर्च कर भारत सरकार एवं राज्य सरकार को नियंत्रण करने के लिए सुझाव दिये जाएंगें।
  5. जरूरतमंद बुद्धिजीवी युवाओं के लिए तकनीकी षिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मार्गदर्षन, उचित संसाधनों की व्यवस्था एवं आर्थिक सहयोग किया जाएगा।
  6. षिक्षा तथा स्वास्थ्य के संबंध में केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा जारी सार्वजनिक योजनाओं को आर्थिक रूप से वंचित परिवारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
  7. उच्चतम स्वास्थ्य लाभ के लिए उच्च तकनीक, शोध एवं रिसर्च कर भारत सरकार एवं राज्य सरकार को स्वास्थ्य नीति में बदलाव लाने के लिए सुझाव दिये जाएंगें।
  8. भारतीय संविधान में कानून को पारदर्षिता से लागू करने के लिए समय एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संविधान में उचित प्रबंधन कर बढ़ते हुए अपराधों पर नियंत्रण के साथ में त्वरित न्याय के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार को सुझाव उपलब्ध करवाये जाएंगे।
  9. आधुनिक तकनीक के माध्यम से कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए उचित अनुसंधान एवं रिसर्च कर जैविक कृषि को बढ़ावा देकर कृषि योग्य भूमि की उपजाऊ क्षमता को बनाये रखने के लिए लोगों में कृषि कार्य के प्रति जागरूकता लाने का प्रयास किया जाएगा।
  10. वर्तमान में कृषि योग्य भूमि में आवष्यकता से अधिक उत्पादन बढ़ाने के लिए किये जा रहे रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल पर रोकथाम कर कृषि योग्य मिट्टी को बंजर होने से बचाने के साथ स्वास्थ्य पर हो रहे प्रतिकूल प्रभाव से बचाने के उपायों पर शोध एवं रिसर्च के माध्यम से आमजन को अवगत करवाया जाएगा।
  11. कृषि, फल, सब्जी एवं पषु-पालन व्यवसाय को वैज्ञानिक तकनीक से अपनाकर रोजगारोन्मुखी बनाने पर जोर दिया जाएगा जिससे बेरोजगारी पर नियंत्रण स्थायी रूप से पाया जा सके और उक्त व्यवसाय रोजगार उपलब्ध कराने में कारगर साबित हो सके।
  12. वन क्षेत्र को रक्षित करने एवं अति आवष्यक पर्यावरण को बनाये रखने के लिए आम लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए विषेष संगोष्ठियों का समय-समय पर आयोजन किया जाएगा।
  13. आध्यात्मिक, भौतिक, एवं स्वास्थ्य के संबंध में जीवन के महत्व को जानने के लिए शोध, रिसर्च एवं अनुसंधान वास्ते अत्याधुनिक विष्व स्तरीय विष्वविद्यालय एवं चिकित्सालय की स्थापना की जाएगी।
  14. समाज में व्याप्त धर्मवाद, जातिवाद, छुआछूत, असमानता, साम्प्रदायिकता, हिंसा, भेदभाव, वैचारिक मतभेदों एवं भ्रष्टाचार से मुक्त कर सुदृढ़/संविधान के आधार पर लोकतांत्रिक राष्ट्र का निर्माण करने के लिए नैतिकता एवं मर्यादित जीवन शैली को धैर्य एवं संतोष के साथ अपनाने के लिए नैतिक षिक्षा का प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
  15. आध्यात्मिक विष्वविद्यालय के माध्यम से वेदों, पुराणों, उपनिषदों, धार्मिक-ग्रन्थों, ऋषि-मुनि/तपस्वियों/संतों के द्वारा लिखे हुए ग्रन्थों/अभिलेखों पर शोध, रिसर्च एवं अनुसंधान कर वास्तविकता के आधार पर वैज्ञानिक जीवन पद्धति को ध्यान में रखते हुए समय एवं परिस्थितियों के अनुसार एक महाग्रन्थ लिपिबद्ध कर सभी धर्मों को एक ही माला में पिरोकर समाज में व्याप्त बुराईयों एवं पाखण्डवाद को समाप्त कर सषक्त राष्ट्र का निर्माण किया जाएगा।
  16. भौतिक जीवन को सुख-षांति एवं अहिंसावादी तरीके से जीने की कला के सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया जाएगा।
  17. ट्रस्ट द्वारा विष्व स्तर पर सरल, सादगीपूर्ण, धैर्य एवं संतोषपूर्ण जीवन जीने के लिए सिद्धान्त प्रतिपादित किए जाएंगें।
  18. ट्रस्ट के माध्यम से सार्वजनिक हितार्थ किये जा रहे समस्त कार्यों को आम-जन तक पहुंचाने के लिए सोषियल मीडिया, प्रिन्ट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं जगह-जगह शेषनाग जनता दरबार लगाकर प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
  19. स्वच्छ पेयजल के साथ-साथ खाने योग्य समस्त वस्तुओं में मिलावट के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाकर मानव समाज में हो रहे स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ को जागरूकता के माध्यम से रोका जाएगा।
  20. लोक कल्याणकारी योजनाएं जो कि भारत सरकार, राज्य सरकारों एवं विष्वस्तरीय संस्थाओं द्वारा संचालित कार्यक्रमों को ट्रस्ट द्वारा आमजन तक पहुँचाया जाएगा।
  21. उक्त ट्रस्ट मे वर्णित कार्यो के संचालन हेतु श्री रामचरण नगर की स्थापना की जाएगी। ट्रस्ट में मुख्य ट्रस्टी को अगर कोई अन्य जन सेवार्थ कार्य लगता है तो उसे ट्रस्टियों की सहमति से क्रियान्वित किया जा सकेगा।

शेषनाग जनता दरबार-घोषणा

मैं स्वप्रमाणित घोषणा करता हूँ कि शेषनाग जनता दरबार द्वारा जारी किए गए समस्त दिषा-निर्देषों को भली-भांति बिन्दुवार पढ़/सुन एवं समझ लिया है। मैंने व्यक्तिगत एवं पारिवारिक सदस्यों को भी उक्त दिषा-निर्देषों के बारें में भली-भांति अवगत करवा दिया है। भविष्य में यदि मैं दरबार से जुड़ा रहा हूँ या नहीं परन्तु दरबार के बारें में झूठी अफवाहें, अमर्यादित भाषा का व्यवहारिक जीवन में प्रयोग नहीं करूंगा। यदि मुझे या मेरे परिवार को दरबार/दरबार के सदस्यों/अन्य भक्तों से कोई आपत्ति है तो शेषनाग जनता दरबार में महाराज जी को लिखित में षिकायत/सुझाव देनेे के लिए बाध्य रहूँगा। शेषनाग जनता दरबार की गरिमा एवं मर्यादाओं का उल्लंघन करते हुए महाराज जी, सदस्य एवं अन्य भक्तों का अपमान या अपमानित करता हूँ तो मैं स्वयं दोष का भागी रहूँगा। मैं दरबार पर मनगढंत/मिथ्या एवं तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत कर अपमानित/गरिमा को धूमिल करता हूँ तो विधि के अन्तर्गत अभियोजन एवं दण्ड के लिए मैं स्वयं उत्तरदायी रहूँगा/रहूँगी।

               यह घोषणा दरबार द्वारा जारी दिषा-निर्देषों को पढ़, समझ एवं सुनने के बाद स्वेच्छा से कर रहा/रही हूँ और शपथपूर्वक यह बयान करता/करती हूँ कि बिना किसी दबाव, प्रलोभन एवं लालच में आकर नहीं जुड़ा हूँ। केवल मैं मेरी निजी, पारिवारिक, व्यवसायिक एवं अन्य समस्याओं के समाधान के लिए दरबार से आपसी चर्चा करके समाधान निकलवाने वास्ते आया हूँ। दरबार में बताए उपाय एवं सलाह के उपरान्त भी मेरी समस्या का समाधान नहीं होता है तो शेषनाग जनता दरबार मेरी समस्या के समाधान के लिए बाध्य नहीं है। दरबार एवं दरबार के किसी भी सदस्य को किसी भी रूप में दान या दक्षिणा नहीं दूँगा। यदि मेरे या मेरे परिवार द्वारा इसके बावजूद भी दान या दक्षिणा दी जाती है तो शेषनाग जनता दरबार किसी भी स्थिति में उत्तरदायी नहीं है। इसके लिए मैं स्वयं जिम्मेदार रहूँगा/ रहूँगी।

 

शेषनाग जनता दरबार के महाराज जी का संदेष

 

  1. आनन्द व सुखमय जीवन जीने के लिए अच्छी संगत एवं संस्कारों के साथ प्रेम को अपनाते हुए स्वाभिमान के साथ जीना चाहिए।
  2. मानव को अपने आप से प्रेम है, वैसे ही समस्त मानव के साथ प्रेम, सद्भाव एवं भाईचारे के साथ जीवन को जीना चाहिए।
  3. मानव को पषु-पक्षी, वनस्पति, पहाड़, नदियां एवं प्रकृति का प्रेम से ख्याल रखना चाहिए जिससे प्रकृति का संतुलन बना रहे।
  4. परमात्मा को प्राप्त करने के लिए प्रेम, श्रद्धा, विष्वास एवं समर्पण का भाव अपनाने पर ही आध्यात्मिक जीवन में प्रवेष किया जा सकता है।
  5. आध्यात्मिक जीवन में प्रवेष के उपरान्त ही सत्संग और निरंतर ध्यान-साधना के द्वारा परमात्मा का साक्षात्कार एवं दर्षन किया जा सकता है।

नोटः-

  1. शेषनाग जनता दरबार, मानव धर्म की स्थापना के लिए किसी भी धर्म, सम्प्रदाय एवं वर्ण व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। बल्कि सत्य, न्याय और मानव धर्म पर चलने के सिद्धान्त प्रतिपादित करेगा जो सर्वधर्म की अच्छाईयों को अपनाते हुए कुरूतियों एवं आडम्बरों का नाष कर मानव धर्म की स्थापना की जावेगी।
  2. शेषनाग जनता दरबार द्वारा मानव धर्म की स्थापना के लिए दण्ड-विधान समान रूप से लागू रखते हुए त्वरित न्याय की व्यवस्था करते हुए अपराध पर अंकुष लगाने के लिए कठोर दण्ड विधान का सिद्धान्त प्रतिपादित किया जाएगा जिससे मानव धर्म को बचाया जा सके।

हमारी परामर्श सेवाएँ

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